समय रहते कराना होगा जन्म और मृत्यु का पंजीकरण, वरना उठानी पड़ेगी दिक्कत, 1 अक्टूबर से बदलेंगे पंजीकरण के नियम

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गूंज। जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रेशन अब समय पर कराना पहले से ज्यादा जरूरी हो जाएगा। देश के साथ उत्तराखंड में भी 1 अक्टूबर 2026 से जन्म और मृत्यु के पंजीकरण के नियम बदल जाएंगे। नए प्रावधानों के तहत जन्म या मृत्यु की सूचना देने में जितनी ज्यादा देरी होगी, पंजीकरण के लिए जांच और मंजूरी का स्तर भी उतना ही बढ़ता जाएगा।

एक साल से ज्यादा लेकिन दो साल तक की देरी होने पर जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराने के लिए DM, SDM या DM की ओर से अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत होगी। वहीं दो साल से ज्यादा देरी होने पर पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) का आदेश अनिवार्य होगा।

यानी अब लंबे समय बाद जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराने वालों के लिए प्रक्रिया पहले से ज्यादा सख्त होगी। संबंधित अधिकारी को जानकारी की सत्यता की जांच के बाद ही पंजीकरण की अनुमति देनी होगी। इसलिए जन्म और मृत्यु का पंजीकरण समय पर कराना जरूरी होगा।

संसद के मानसून सत्र में रजिस्ट्रेशन ऑफ बर्थ एंड डेथ्स (अमेंडमेंट) बिल पारित किया गया था। लोकसभा ने इसे 31 जुलाई और राज्यसभा ने 4 अगस्त को मंजूरी दी। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर यह रजिस्ट्रेशन ऑफ बर्थ एंड डेथ्स (अमेंडमेंट) एक्ट, 2026 बन गया। केंद्र सरकार ने अब अधिसूचना जारी कर इसके प्रावधानों को 1 अक्टूबर 2026 से लागू करने की तारीख तय की है।

सरकार ने नियम क्यों बदले?

नए प्रावधानों का उद्देश्य जन्म और मृत्यु से जुड़े रिकॉर्ड को सटीक, विश्वसनीय और समयबद्ध बनाना है। लंबे समय बाद पंजीकरण कराने के मामलों में जानकारी की सत्यता की जांच जरूरी होती है। इसी वजह से देरी की अवधि के हिसाब से मंजूरी का स्तर तय किया गया है। नए नियमों में जितनी ज्यादा देरी होगी, उतने ही उच्च स्तर पर मामले की जांच और मंजूरी की जरूरत होगी। इससे जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया में निगरानी बढ़ेगी।

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