
गूंज, चम्पावत। पितरों के प्रति श्रद्धा, तर्पण और तृप्ति का पावन पर्व पितृ पक्ष इस वर्ष 27 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगा। पाटन पाटनी निवासी प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. दीपक चन्द्र पाटनी ने पितृ पक्ष की श्राद्ध तिथियों की जानकारी देते हुए बताया कि इस अवधि में विधि-विधान से पितरों का तर्पण, पिंडदान एवं श्राद्ध किया जाता है।
पं. पाटनी के अनुसार पितृ पक्ष में पितरों के निमित्त जल, कुश, तिल एवं पुष्प से तर्पण करने की परंपरा है। उन्होंने बताया कि 4 अक्टूबर को नवमी तिथि पर माताओं का श्राद्ध तथा 10 अक्टूबर को अमावस्या के दिन पितृ विसर्जन किया जाएगा।
पितृ पक्ष की प्रमुख तिथियां:
27 सितंबर, रविवार: प्रतिपदा श्राद्ध आरंभ
28 सितंबर, सोमवार: द्वितीया
29 सितंबर, मंगलवार: तृतीया
30 सितंबर, बुधवार: चतुर्थी/पंचमी
1 अक्टूबर, गुरुवार: षष्ठी
2 अक्टूबर, शुक्रवार: सप्तमी
3 अक्टूबर, शनिवार: अष्टमी
4 अक्टूबर, रविवार: नवमी — माताओं का श्राद्ध
5 अक्टूबर, सोमवार: दशमी
6 अक्टूबर, मंगलवार: एकादशी
7 अक्टूबर, बुधवार: द्वादशी
8 अक्टूबर, गुरुवार: त्रयोदशी
9 अक्टूबर, शुक्रवार: चतुर्दशी
10 अक्टूबर, शनिवार: अमावस्या, पितृ विसर्जन
पं. पाटनी ने बताया कि पितृ पक्ष के दौरान श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण और तर्पण करने की धार्मिक परंपरा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपनी परंपरा और स्थानीय धार्मिक विधि के अनुसार श्राद्ध एवं तर्पण करने की बात कही।
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