
गूंज, हरिद्वार। चर्चित निठारी कांड से जुड़े रहे सुरेंद्र कोली की शुक्रवार, 18 सितंबर को हरिद्वार में मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, उसका शव उत्तरी हरिद्वार के सप्तसरोवर रोड क्षेत्र स्थित उसकी चाय की दुकान में फंदे से लटका मिला। प्रारंभिक जांच में पुलिस इसे आत्महत्या मानकर जांच कर रही है। घटनास्थल से फिलहाल कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है।
पुलिस के मुताबिक, सूचना मिलने के बाद टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की। मृतक की पहचान उसकी आईडी के आधार पर सुरेंद्र कोली के रूप में हुई। वह मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के मंगरूखाल का रहने वाला बताया गया है और पिछले कुछ समय से हरिद्वार में रहकर किराये पर चाय की दुकान चला रहा था।
सुरेंद्र कोली का नाम वर्ष 2006 के बहुचर्चित निठारी कांड में सामने आया था। इस मामले में उसे लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा। हालांकि, वर्ष 2025 में सर्वोच्च न्यायालय ने उसे निठारी हत्याकांड से जुड़े मामलों में बरी कर दिया था।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। सुरेंद्र कोली की मौत के वास्तविक कारणों को लेकर जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
जानिए क्या है निठारी कांड
निठारी इलाके में 2005-06 के दौरान बच्चों और महिलाओं के लापता होने की घटनाओं ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी थी। लगातार सामने आ रहे इन मामलों की पड़ताल के दौरान पुलिस 29 दिसंबर 2006 को सेक्टर-31 स्थित कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी D-5 तक पहुंची। कोठी के पीछे मौजूद नाले और आसपास के इलाके की तलाशी में पुलिस को कई मानव खोपड़ियां, हड्डियां, कपड़े और दूसरी चीजें मिली थीं।
इन बरामदगियों के बाद मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके घरेलू सहायक सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार कर लिया गया था. इसके बाद जनवरी 2007 में इस मामले की जांच CBI को सौंप दी गई। पुलिस ने गुमशुदगी और अपराध से जुड़े कुल 19 अलग-अलग FIR दर्ज किए थे। इनमें से 16 मामलों में CBI ने चार्जशीट दाखिल की थी। जांच के दौरान सुरेंद्र कोली पर हत्या, दुष्कर्म, अपहरण और सबूत मिटाने जैसे आरोप लगाए गए थे।
इस मामले में सह-आरोपी रहे मोनिंदर सिंह पंढेर भी कई साल तक जेल में रहे थे। केस में बरी होने के बाद उन्हें 20 अक्टूबर 2023 को जेल से रिहा कर दिया गया था। 2006 में गिरफ्तारी के समय सुरेंद्र कोली की उम्र 30 साल थी। अलग-अलग मामलों में उसे वर्षों के दौरान कई बार मौत की सजा सुनाई गई थी।
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