
गूंज, चम्पावत। उत्तराखंड के 14वें Young Uttarakhand Cine Awards (YUCA 2026) को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। उत्तराखंडी संगीत और फिल्म जगत से जुड़े कलाकार अब अवॉर्ड्स की चयन प्रक्रिया, कलाकारों के सम्मान और आयोजन से जुड़े अनुभवों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। विवाद की शुरुआत लोक कलाकार एवं अभिनेत्री श्वेता माहरा की सोशल मीडिया पोस्ट से हुई, जिसके बाद कुमाऊंनी गायक इंदर आर्या ने भी अपनी पोस्ट के माध्यम से कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
दरअसल, इस वर्ष YUCA 2026 में उत्तराखंडी संगीत की विभिन्न श्रेणियों में कई गीतों को नामांकन मिला है। हालांकि, लोकप्रिय उत्तराखंडी गीत “जिया कोरी कोरी खांदो” को नामांकन में जगह नहीं मिलने पर श्वेता माहरा ने नाराजगी जताई। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा— “Awards बिकने का time आ गया है, हर साल की तरह इस साल भी… जिया कोरी कोरी के लिए मुझे बहुत बुरा लगा।”
श्वेता माहरा की इस पोस्ट के बाद मामला और चर्चा में आ गया। खास बात यह है कि “जिया कोरी कोरी खांदो” गीत में श्वेता माहरा की कोई भूमिका नहीं है, बल्कि गीत में अभिनेत्री तन्नू रावत प्रमुख भूमिका में हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि श्वेता ने गीत की लोकप्रियता और उसे मिले दर्शकों के प्यार को देखते हुए अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
श्वेता की पोस्ट के बाद इंदर आर्या ने भी उठाए सवाल
श्वेता माहरा की पोस्ट को शेयर करते हुए कुमाऊंनी गायक इंदर आर्या ने YUCA से जुड़े अपने पिछले अनुभव साझा किए। उन्होंने लिखा कि श्वेता को जहां एक गीत के नामांकन न मिलने का दुख है, वहीं उन्होंने पिछले नौ वर्षों में कई हिट गीत देने के बावजूद सम्मान नहीं मिलने की बात कही।
इंदर आर्या ने अपने पोस्ट में YUCA के आयोजन और कलाकारों के साथ कथित व्यवहार को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने रिहर्सल के दौरान कलाकारों को दिए गए अलग-अलग समय, मंच पर रिहर्सल में किए गए बदलाव और कलाकारों के ठहरने की व्यवस्था में कथित अंतर का जिक्र करते हुए इसे भेदभाव बताया। इंदर आर्या ने यह भी कहा कि उन्होंने पिछले वर्ष आयोजन के दौरान अपनी आंखों से ऐसी व्यवस्थाएं देखीं और समय आने पर वह इस विषय पर विस्तार से बोलेंगे।
क्या पारदर्शी है YUCA की प्रक्रियाज
YUCA यानी Young Uttarakhand Cine Awards उत्तराखंड की क्षेत्रीय फिल्मों, संगीत, लोक कला और संस्कृति को मंच देने वाला वार्षिक सम्मान समारोह है। इसकी शुरुआत वर्ष 2009 में ‘यंग उत्तराखंड’ संस्था द्वारा की गई थी। इस वर्ष YUCA 2026 का आयोजन 30 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में प्रस्तावित है।
ऐसे में श्वेता माहरा और इंदर आर्या की टिप्पणियों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि अवार्ड्स के लिए नामांकन और विजेताओं के चयन के क्या मापदंड हैं और क्या पूरी प्रक्रिया कलाकारों के लिए पूरी तरह पारदर्शी है?
हालांकि, सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों को फिलहाल संबंधित कलाकारों के व्यक्तिगत अनुभव और दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। YUCA की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
श्वेता माहरा और इंदर आर्या की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। कुछ लोग कलाकारों की नाराजगी को जायज बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे व्यक्तिगत असंतोष या गलतफहमी मान रहे हैं। दरअसल, उत्तराखंड का संगीत और फिल्म उद्योग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे दौर में कलाकारों के बीच सम्मान, पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर उठने वाले सवाल महत्वपूर्ण हो जाते हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि YUCA 2026 की आयोजन समिति इन सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देती है और क्या अवॉर्ड चयन की प्रक्रिया को लेकर स्थिति साफ की जाती है। फिलहाल इतना जरूर है कि श्वेता माहरा की एक सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ विवाद अब उत्तराखंड के कलाकारों को मिलने वाले सम्मान और YUCA की चयन प्रक्रिया तक पहुंच गया है।
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